अपने घर के मन्दिर को बनाएं वास्तु से Perfect

अपने घर के मन्दिर को बनाएं वास्तु से Perfect

विभिन्न दिवि-देवताओं के लिए पूजा की अलग-अलग दिशा होती है . जैसे – मान काली का क्षेत्र दक्षिण (south) दिशा है , भगवान विष्णु का पूर्व (east) . लेकिन यह सबके लिए संभव नहीं है . वास्तु के अनुसार पूजा स्थान के लिए उत्तर-पूर्व (north-east) दिशा को सबसे उचित माना गया है . यहाँ किसी भी देवी-देवता का पूजन किया जा सकता है .

North-east दिशा में पूजा का स्थान बनाना संभव नहीं हो प् रहा है , तो उत्तर (north) दिशा को पूजा का स्थान बना सकते हैं .

जिस घर में दक्षिण (south) में पूजा होती है , वहां हमेशा लड़ाईयां होती है . Family में मतभेद होता है . दक्षिण (south) दिशा को यम की दिशा मानी जाती है इसलिए इस ओर आराधना करने में मुश्किल आती है .

घर में बने पूजा घर को सार्वजनिक मंदिरों की तरह बहुत ज्यादा नहीं सजाना चाहिए .

पूजा के कमरे को हल्के रंग से रंगवाए . सफ़ेद , हल्का नीला और हल्के पीले रंग का इस्तेमाल इसके लिए किया जा सकता है .

पूजा की जगह पर भगवान की मूर्ति के बदले भगवान की फोटो रखें . मूर्ति की स्थापना मंदिरों में होती है . भगवान की फोटो सवा 5 इंच से बड़ी नहीं होनी चाहिए .

शंख बजने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है . लेकिन घर के मन्दिर में शंख बजने की सही विधि का ज्ञान होना जरुरी है .

पूजा करते समय हमेशा ताजे फुल ही भगवान को अर्पित किए जाने चाहिए .

पूर्वजों की फोटो को कभी भी भगवान की फोटो के साथ नहीं रखें . ध्यान रहें , पितरों का स्थान दक्षिण-पश्चिम (south-west) होता है .

Bedroom में पूजा घर बनवाना वास्तु के अनुकूल नहीं माना जाता है .

पूजा घर के ऊपर या निचे कभी भी शौचालय नहीं होना चाहिए .

इस बात का भी ध्यान रखें कि पूजा की खिड़की और दरवाजा पश्चिम (west) दिशा की ओर हो . बेहतर होगा अगर ये उत्तर (north) या पूर्व (east) दिशा में बने हों .

पूजा घर में किसी तरह का कूड़ादान नहीं रखें .

पूजा घर में मार्बल का फर्श लगवाना चाहते हैं , तो इसके लिए सफ़ेद संगमरमर का ही इस्तेमाल करें .

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