बचत जीवन का मूल मंत्र – Save Money, The Key To Life

बचत जीवन का मूल मंत्र – Save Money, The Key To Life

अपनी समृद्धि के लिए मनुष्य को जो बात सबसे पहले सीखनी चाहिए वह यह है कि बचत कैसे करे . यदि वह धन बचाता है , तो यह सबसे अच्छी आदत है और अन्य आदतों से बहुमूल्य भी . बचत ही समृद्धि का मूलमंत्र है और सौभाग्य का मूलधन भी . सभ्य और जंगली व्यक्ति में भेद जताने वाली बात बचत है . बचत से समृद्धि तो होती ही है , मनुष्य के चरित्र का निर्माण भी होता है .

आज के व्यक्ति धन को कुछ नहीं समझते और उसे यूं ही नष्ट कर देते हैं . उनको यह ज्ञान नहीं कि उसी पर समृद्धि की नीव रखी जा सकती है . व्यक्ति की आय कितनी भी कम हो , पर यदि वह उसमें भी बचत करता है , तो कोई-न-कोई आरम्भ किया जा सकता है . जिस व्यक्ति के पास कुछ भी नहीं , वह तो असहाय है . वह धंधा या व्यापार आदि भी तो नहीं कर सकता .

जब लोग निर्धन हो जाते हैं तो उन्हें आत्मरक्षा करने और सम्मान बचाने में भयंकर कठिनाई होती है . धन बचत करने की आदत अवश्य डालनी चाहिए , क्योंकि सोच समझकर की हुई बचत को आप कभी उदारपुर्वक किसी जरूरतमंद को दान भी कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर खर्च भी कर सकते हैं .

बचपन में बच्चे अनेक प्रकार की चीजें इकट्ठी करते हैं . यह आदत अच्छी है , इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और इसका विकास करके इसे धन की बचत की ओर लाना चाहिए . यह सही है कि बड़े लोगों या व्यापारियों को सुतली , डोरी और पैकिंग का बचा हुआ सामान संभालकर रखने की फुरसत नहीं होती , परन्तु यदि उन्हें किसी प्रकार बचाकर रख लिया जाए , तो आड़े वक़्त में यही चीजें बहुत काम आती हैं

युवावस्था में प्राय: अधिकांश लोग लोभ-लालसाओं में रूपए बरबाद करते है , परन्तु चतुर और बचत करने वाला व्यक्ति इस प्रकार की वृत्तियों से बचा रहता है . Frenklin अपने जीवन की इस महान कला के आधार पर ही लोकप्रिय ही नहीं अमर भी हो गया . उसकी यह व्यावसायिक बुद्धिमानी ही प्रौढ़ावस्था तक पहुँचते-पहुँचते उसे महान बना गई .

एक अर्थशास्त्री (economist) ने लिखा है कि कोई भी देश अर्थ-संकट (economy crises) के दिनों में देशवासियों की छोटी-छोटी बचत-राशियों से महान संकट से पाने को बचा सकता है . जब उत्पादन स्थिर हो और व्यय कम , लोग सोच-समझकर पैसा खर्च करते हों , तो देश अधिक समृद्ध होता है .

आप कोई चीज खरीदना चाहतें हैं , तो उसके लिए अभी से बचत आरम्भ कीजिए . इसका उपाय यह है कि यदि आप खाने में दस रूपए खर्च करते हैं , तो ऐसा प्रयत्न कीजिए आठ रूपए में ही काम चल जाए . एक आदमी की इच्छा सोने की घड़ी खरीदने की थी . वह अपने दोपहर के खाने पर जो खर्च करता था , उसने निश्चय किया कि अब वह आधे में काम चलाएगा . कुछ दिनों में इतनी रकम इकट्ठी हो गई की वह घड़ी खरीद सकता है .

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