लड़कियां भी किसी से कम नहीं – लड़कियों को लड़कों के समान समझे

लड़कियों को लड़कों के समान समझे, beta-beti ko ek jaisa samjhe, ladka ladki ko ek jaisa samjhe…

बच्चों के personality के development और उन्हें well behaved बनाने के लिए ये भी जरूरी है कि माता-पिता अपने बेटों और बेटियों को एक समान समझें . लेकिन देखा गया है कि आज भी कुछ दकियानूसी लोग बेटी और बेटे में धरती-आकाश जैसा अंतर समझते हैं .

इस सम्बन्ध में Panday जी का example मेरे सामने है , उनके दो बच्चे हैं एक बेटी और एक बेटा . Panday जी office से लौटते ही बेटे को गौद में उठा लेते हैं . बेटी देखती रहती है .

तभी श्रीमती Panday अपनी बेटी को पुकारती है और कहती है – ‘ मुन्नी – पापा के लिए पानी ले आओ ‘
नन्ही मुन्नी Papa के लिए पानी ले आती है . तभी Panday जी के गौद में बैठा उनका बेटा उनसे मुन्नी की compliant करता है – ‘ Papa, दीदी ने हमारा खिलौना तोड़ दिया ‘ .
Panday जी ये सुनकर बेटी को डांटते हैं .
बेटा गर्व से मुस्कुराता है .
बेटी दुखी हो जाती है .

Partiality का ये example है जो आपको बहुत से families में देखने को मिल सकता है . इससे मिलते-जुलते और भी बहुत से examples हैं .
मैंने बहुत से families देखा है . गलती बेटे की होती है , पर उसकी सजा बेटी को मिलती है .

Question यह है कि – ऐसा होता क्यों है ? माता-पिता लड़के और लड़की में इतना अंतर क्यों समझते हैं ? इसके पीछे माता-पिता की रूढ़िवादी मानसिकता होती है , अथवा कुछ और ?

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