जीवन इतना ही नहीं – Life is not only this, In HINDI

कुछ लोग दुसरे जीवन की बात छोड़ दी पर हमनें नहीं छोड़ी . हमारे ऋषियों ने नहीं छोड़ी और हमारे धर्मग्रंथों ने भी नहीं छोड़ी . वह कहते हैं – जीवन एक सतत बहती हुई धारा है , इस पर न जाने जन्म-मृत्यु रूपी कितने दिन-रात व्यतीत हो गये . एक स्थान पर भगवान ने सखा अर्जुन से कहा भी है कि – ‘ तू यह मत सोच कि हम और तुम इसी जन्म में इकट्ठे हुए हैं , मेरा तेरा अनेक जन्मों का साथ है . मुझे सब पता है , तुझे इसकी याद नहीं है . ‘

तुन जानते हो , एक फल लगता है , कुछ समय लगा रहता है , बढ़ता है , फिर पाक कर गिर जाता है , और आगे वही फल दुसरे वृक्ष को जन्म देता है , ऐसे ही – यह शरीर पैदा होता है , कुछ काल बढ़ता है , फिर वृद्ध होकर समाप्त हो जाता है , परन्तु इसी से आगे की सन्तान का निर्माण होता है . केले का एक पेड़ पैदा हुआ , वह बढ़ा फल आया , समाप्त हुआ – साथ ही दुसरे पेड़ जड़ में से निकल कर ऊपर आ गया , वह कभी नाश नहीं होगा . इसलिए अपने जीवन को क्षुद्र नहीं बल्कि महान समझो , क्षणभंगुर नहीं बल्कि अमर समझो , क्योंकि ऐसा पता लग चूका है कि शरीर मरता है , जीव की मृत्यु नहीं होती .

जैसे पुरुष पुराने वस्त्र उतार कर नये वस्त्रों को पहन लेता है , ऐसे ही जीवात्मा पुराने को त्याग कर नये शरीरों को धारण कर लेता है . उसी ज्ञान की हमें आवश्यकता है .

जब हमें ज्ञान होगा तो हम मरेंगे नहीं , कल भी हमें इसी संसार में रहना है . तब फिर , थोड़ा समझदारी से काम लो . हम आज जो सब इकट्ठे हुए हैं , अकारण नहीं – किसी कारण से ही है , पारस्परिक एक वास्तविक स्नेह है . तुम सोचो किसी से दवेष भी हो जाय , तो हमारा लगाव उससे रहता है . हमारा लगाव मनुष्य से है , यहाँ तक कि वह पर्वतों से है , नदियों से है और वृक्षों से भी है .

यहाँ यह सब कुछ न हो तो मनुष्य ठहर नहीं सकता . बड़े-बड़े ऋषियों को देखा है , वह चाहे मनुष्यों से अलग रहे हों , परन्तु गायों से , हिरणों से , फूलों से , पक्षियों से , जंगली जानवरों से खूब मिले हैं . वे उनसे बात करते और कभी सब छोड़ मनुष्यों से मिलने को भी निकल आते हैं क्योंकि हम आत्मा एक परमेश्वर का रूप है , हर वाणी उस परमेश्वर की वाणी है , और हर एक का आनन्द उस ईश्वर का आनन्द है .

बस जब हमारा यह राग-द्वेष मिट जायेगा तो हर जीव ईश्वर की ही कोटि का दिखाई देगा . बच्चे चाहे पानी और बर्फ में बहुत बड़ा अन्तर समझतें हों , परन्तु बड़े जानते हैं , कि जल से ही हिम बन गई है .

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