सही तरीके से दिवाली कैसे मनाये ?

दिवाली भारत का सबसे बड़ा और आकर्षित पर्व है. दिवाली की रात अमावस्या की रात होती है इसलिए सभी लोग अपने घर के बाहर दीप जलाते हैं ताकि उस दीप की रौशनी से पूरी दुनिया में प्रकाश फैले और अंधकार मिट जाये. दिवाली एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिसे विनम्रता से मनाया जाता है, लेकिन आज-कल इस दिन को लोग बहुत ही गलत तरीके से मनाते हैं और इस तरह गन्दगी फैलाते हैं जिससे हमारा वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो जाता है. इसलिए आज हम अपने इस article में जानेगे कि दीपावली को अच्छे और सही तरीके से कैसे मनाते है ?

सबसे पहले ये जानेंगे कि दीपावली क्यों मनाते है ?

कहा जाता है कि जब राजा दसरथ के पुत्र प्रभु श्री राम ने दुष्ट रावण को मार कर माता सीता हो उसके चंगुल से छुड़ाया और 14 साल बाद वनवास से लौटे, तब अयोध्या के निवाशी उन्हें देखकर बहुत आनंदित हो गये थे. उनके आने की खुशी में सरे राज्य में दिये जलाये गए. इसीलिए हर साल कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनाया जाता है और इसे आलौक का त्यौहार भी कहा जाता है. आपने तो जान ही लिया होगा कि दिवाली क्यों मनाई जाती है , चलिए जानते है की दिवाली कैसे मनाये ?

दिवाली कैसे मनाये ?

आपको लगता होगा कि ये तो सबको पता है कि दिवाली कैसे मनाते है ? पर मैं आपको दिवाली सही तरीके से कैसे मनाते है ये आपको बताऊंगा जिससे आप एक खुशहाल और सुरक्षित दिवाली का आनंद उठा सके. गहर के सभी बच्चे दीपावली का बड़ी ही बेसब्री से इन्तेजार करते हैं क्योंकि उस दिन उन्हें बहुत सारे पटाखे जलाने का अवसर मिलता है. बच्चों की खुशी देख कर हम सब का मन भी खुश हो जाता है और उनकी पसंद के सारे छोटे-बड़े पटाखे हम बाजार से खरीद कर ले आते है.

वो तो बच्चे हिं उन्हें सही और गलत का फर्क कहा मालूम रहता है, लेकिन हम तो बड़े हिं उनकी सेहत का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है. पटाखों के तरह-तरह का chemical इस्तेमाल कर बारूद बनाये जाते हैं और ये सभी छोटे-बड़े पटाखों में डाले जाते हैं. पटाखों के जलने के बाद उनमे से जो धुआं निकलता है वो हमारे आस-पास के वातावरण में फैल जाता है और जब भी हम सांस लेते हैं ये सभी चीजें जो हवा में होती है वो सीधे हमारे शरीर के अन्दर जाती है और विभिन्न प्रकार की बिमारियों को पैदा करती है.

ये धुआं हमारे लिए ही खराब नहीं है बल्कि पौधे और जानवरों के लिए भी उतना ही खतरनाक है. हमारी गलती की सजा उन्हें भी भुगतनी पड़ती है. इसलिए दिवाली में पटाखे का इस्तेमाल न करें, ऐसा मैं बिलकुल भी नहीं कह रहा मैं बस यही कहना चाहता हूँ कि छोटे-छोटे पटाखों का इस्तेमाल करें जैसे- अनार, चक्करी , छिरझरी.. इन सभी पटाखों से भी प्रदुषण होता है लेकिन बड़े-बड़े पटाखों की मात्रा में कम होता है, जो की छोटे पटाखों से ज्यादा खतरनाक होते हैं.

बड़े पटाखों से बच्चों को दूर रखें और बड़े लोग जो इन पातकों का इस्तेमाल करते हिं वो भी सावधानी बरते. क्योंकि इन पटाखों से आपके शरीर पर  चोट लगने से ज्यादा असर होते हैं. आपने ये भी देखा होगा कि पटाखे जल जाने के बाद लोग रस्ते पर ही उन पटाखों के छिलकों को छोड़ देते हैं, जिससे अगले दिन अगर आप घर के बाहर देखें तो चारो और गंदगी ही फैली रहती है.

गंदगी सभी मिल कर करते हैं लेकिन उन्हें साफ करने कोई आगे नहीं आता. इन गंदगियों को कौन साफ करेगा ? हमें ही साफ करना पड़ेगा. जब हम अपने घर के अंदर गंदगी नहीं देख सकते तो घर के बहार देखकर क्यों छोड़ देते हैं ? ये धरती भी तो हमारी माँ है, उसे साफ सुथरा रखने भी हमारा कर्तव्य है.

ये थे सुरक्षित दीपावली से जुड़ी कुछ जानकारी. अपने कर्तव्यों से पीछे मत हटिये और इस दिवाली को पिछले दिवाली से बहुत खास और बेहतर बनाइये. इन बातों को ध्यान में रखें और अपने आस-पास के लोगों को सही तरीके से दिवाली मनाने के लिए सिख दें. आप सभी को दिवाली की बहुत-बहुत शुभ कामनाएं.

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