कुलू – एक अदभुत प्रकृति की गोद

भारत के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र में कुलू का नाम बड़ी शिद्दत से लिया जाता है| यहाँ की प्रकृति इतनी मनमोहक है की इसकी गोद में बैठने का मजा ही कुछ और है| प्राकृतिक सम्पदा और स्थानीय उत्पाद से भरा कुलू और मनाली आपके मन में ऐसे रंग जाएगा जिसे भुलाने की इजाजत आपको अपने दिल से नहीं मिल पाएगी | यहाँ सिर्फ प्राकृतिक सौन्दर्य नहीं है इसे देवताओं का आँचल भी कहा जा सकता है | तो चलिए आज जानते हैं की इस क्षेत्र में क्या ख़ास है जो आपको इसकी सैर करने पे मजबूर कर सकता है |

• दशहरे का मेला

दशहरे के अवसर पर लगने वाला मेला यहाँ बड़ा भारी होता है| बाहर से आये हुए पर्यटक इस मेले का भरपूर आनंद लेते है साथ ही बाहर से आये हुए यात्रियों के लिए बनी हुई देशी और अंग्रेजी दुकानों और कुछ होटलों की बात ही अलग है | इसलिए यहाँ पर ग्राहक और विक्रेता दोनों ही बहुत बड़ी उमंगें लेकर आते है | रंग-बिरंगे कम्बल, पश्मीना, कई प्रकार की खालें जैसे- मृग की खाल, बाग़ की खाल इत्यादि, तरह-तरह के जूते, मोज़े पर्यटकों के मन को मोह लेते हैं |

• व्यास नदी

व्यास नदी के बहाव के कारण जो जमीन कटकर बराबर हो गई है उसमे कटराई सबसे सुन्दर स्थान है | यहाँ घाटी खूब चौड़ी हो गई है और किसी तरफ कुछ ऊपर चढ़कर देखने से फैले हुए धान के खेतों और बीच-बीच में सेब, नाशपाती, खुजानी, और आलूचे के पेड़ों का बहुत ही मनोरम दृश्य दिखाई देता है जो लोगों के मन को मोहने में कोई भी कसर नहीं छोड़ता है |

• कलाकार

क्या आपको पता है की कुलू कला का एक बहुत बढ़िया उदाहरण हो सकता है | यहाँ मौजूद कलाकार किसी भी चीज को एक ऐसा आकार दे देते हैं की उस दृश्य को अपने मन से दूर करना एक बहुत बड़ा काम हो जाता है | कुलू में मौजूद कई सारी दर्शनीय प्राचीन मंदिर यहाँ के कलाकारों के द्वारा निर्मित ऐसी कला है जो जाने वाले का मन मोह लेती है |

• कलाथ

कलाथ में गर्म पानी का कुंड है जिसमे गंधक और कई सारे अन्य रसायन काफी मात्रा में होते हैं जो कपडे धोने के लिए मशहूर है | इस कुंड का गरम पानी उनी कपड़ों के लिए एक अच्छा लाँड्री माना जाता है |

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