गर्भपात क्यों होता है और कैसे इनसे बचा जाये ?

90 दिनों तक या इससे पहले गर्भाशय से अगर गर्भ बाहर आ जाए तो उसे गर्भपात यानि miscarriage कहते हैं. Medical science के अनुसार अगर पहले तीन महीने में ही गर्भाशय से गर्भ बह जाए, तो उसे miscarriage और दुसरे तीन महीनो तक, यानि 6 माह में गर्भ बाहर आ जाए, तो उसे abortion कहते हैं. और 9 महीने से पहले गर्भ बाहर आ जाए तो उसे premature birth कहते हैं. जिस महिला को 3 या उससे अधिक बार गर्भपात हो जाते हैं, उसे habitual abortion कहते हैं.

Miscarriage क्यों होता है ? गर्भपात होने के अनेक कारण होते हैं , जैसे –

  • महिला का 16 वर्ष से कम की उम्र होना और पुरुष की 25 वर्ष से कम की उम्र में से-क्स करना
  • दौड़ धुप करना
  • रस्सी कूदना
  • खेलकूद में सक्रियता से भाग लेना
  • उछलना-कूदना
  • Pregnancy में कमर कसकर कपड़े पहनना
  • से-क्स की अधिकता
  • अत्यधिक व्यायाम या शारीरिक श्रम करना
  • भरी चीजें उठाना
  • ऊंचाई पर चढ़ने की कोशिश में गिरना
  • तेज प्रक्रति की एलोपैथिक
  • आयुर्वेदिक दवाइयां खाना
  • पेट और कहीं चोट लगना
  • उबड़-खाबड़ रास्ते पर यात्रा करना
  • रात में अधिक जागना और दिन में अधिक सोना
  • अधिक गर्मी, धुप और आग के संपर्क में आना
  • क्रोध, चिंता, शोक, भय जैसे मानसिक तनाव पहुचाने वाले कारण
  • पोषक पदार्थो का सेवन न करना
  • गर्भाशय की विकृतियाँ
  • अधिक उपवास करना
  • शराब जैसे मादक द्रव्यों का अधिक सेवन
  • ह्रदय और रक्त के रोग होना

गर्भपात होने के पूर्व, कमर, गर्भाशय, कुल्हे और उदर में दर्द होने लगती है और योनी मार्ग से रक्त भी आने लगता है. कहा गया है कि चिकित्सा से बेहतर बचाव करना होता है.

यदि गर्भपात की आशंका हो तो –

महिला को पूर्ण आराम करने दें और उसे हिलने-डुलने न दें

उस पर शारीरिक और मानसिक भर न पड़ने दें

पैरों के निचे तकिया लगाकर ऊँचा रखें और तब तक ऐसी अवस्था में रखें, जब तक रक्तस्राव बंद न हो जाए.

रक्तस्राव बंद हो जाने के बाद ही आराम से उठे.

भोजन हल्का , digestible और soft दें  योनी और पेडू पर बर्फ से भीगा कपड़ा या बर्फ के पानी की थैली रखें.

चाय , कोफी जैसे उत्तेजक पदार्थ सेवन न करने दें .

डॉक्टर की सहायता प्राप्त कर गर्भपात होने से बचने का पूरा प्रयत्न करें .

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