बच्चा ना होने का दुःख – सुनी गोध

माँ बनना हर स्त्री का सौभाग्य होता है. माँ बनने के बाद ही स्त्री को नारीत्व की पूर्णता मिलती है , लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ स्त्रियां किसी कारणवश शादी के कसी साल गुजर जाने के बाद भी माँ नहीं बन पाती . इससे अधिकांश स्त्रियां हिन भावना की शिकार हो जाती है . उन्हें संतान न होने पर समाज-परिवार और रिश्तेदारों की तरफ से काफी अपमान झेलना पड़ता है .

सच तो ये है कि जिस चीज के लिए स्त्री जिम्मेदार नहीं होती , उसी चीज के लिए नाते-रिश्तेदार और पड़ोसी तक तरह-तरह के ताने देते हैं और उस पर दुनिया भर के सवालों को बौछार लगा देते हैं .

बच्चा ना होने का दुःख - सुनी गोध

उसी दबाव में , टेंशन में बेचारी स्त्रियां माँ बनने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हो जाती हैं और तांत्रिकों और ढोंगी संतो के चक्कर में फंस जाती हैं . World Health Organisation (WHO) के द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार आज भी 6 से 8 करोड़ couple संतान सुख से वंचित है और भारत जैसे देश में भी निशंतान जोड़ों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत है . इसका मुख्य कारण रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ रहा मानसिक तनाव और प्रदूषण है .

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संतानहीन की समस्या की चपेट में अमीर-गरीब सभी होते हैं , लेकिन गरीब couples को इस समस्या की दोहरी मार झेलनी पड़ती है क्योंकि एक तरफ तो संतान न होने पर परिवार व समाज के दबाव से बनी टेंशन होती है तथा दूसरी तरफ पैसो की तंगी के बावजूद भी इलाज कराने में क्षमता से अधिक धन खर्च होता है .

ऐसे गरीब निसंतान couples की मज़बूरी का फायदा नीम-मकीम की जमात भी खूब उठाती है . आज कल भारत के कोने-कोने में नीम-हकीम द्वारा संचालित ‘ fertility clinic ‘ किरण दुकानों की तरह खुले हुए हैं .

बहुत से झोलाछाप डॉक्टर , वेधों , हकीमों द्वारा अखबारों में ‘ औलाद के इच्छुक पति-पत्नी दोनों मिलें ‘ या ‘ निल शुक्राणुओं का पक्का इलाज ‘ आदि वाक्यों वाले विज्ञापन छपवाए जाते हैं और रलवे लाइनों के साथ-साथ , bus stand तथा भीड़ वाले public place की दीवारों पर भी लिखवाए जाते हैं . हर जगह इन विज्ञापनबाजों का धंधा चल रहा है , लेकिन फिर भी बेचारी संतानहीन स्त्रियों की सुनी गोद नहीं भर पाती .

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आज medical science में अनेक research और experiments से proof हो चका है कि संतानहीन का इलाज पूरी तरह सम्भव है , परन्तु यशी जानकारी के अभाव में दुखी-परेशान संतानहीन पति-पत्नी जगह-जगह भटकते रहते हैं .

आम तौर पर अधिकांश स्त्रियां अपनी प्रजनन शक्ति और गर्भधारण क्षमता से परिपूर्ण होती है , लेकिन वे अपने पति के वीर्य (sperm) दोष एवं अन्य कमी या कमजोरी के कारण माँ बनने का शौभाग्य प्राप्त नहीं कर पाती . यदि समझदारी से काम लिया जाए तो स्त्रियां संतानहीन के अभिशाप से छुटकारा पाकर अपनी सुनी गोद भर सकती है .

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कृत्रिम गर्भाधान विधि (Artificial insemination method) द्वारा वे माँ बन सकती है . कृत्रिम गर्भाधान द्वारा स्त्री गर्भवती होकर सुन्दर व स्वस्थ संतान को जन्म देती है जिससे पति-पत्नी दोनों को ही माता-पिता बनने का सोभाग्य प्राप्त होता है .

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