तोता और चने की दाल – Motivational story In Hindi: एक बार एक तोता शहर घूमने जा रहा था। उसे एक जगह खूंटे पर एक चना मिला। उसे देखकर तोता तुरंत चना फोड़ने लगा। चने की एक दाल खूंटे में फँस गई। दूसरी दाल तोता खा गया। फसी हुई दाल को निकलवाने के लिए तोता बढ़ई (carpenter) के पास पहुँचा और बोला ‘आप खूंटा चीरकार दाल निकल दीजिए’।

बढ़ई बोला, ‘क्या मैं तुम्हारा नौकर हूँ जो दाल निकालु’।

तोता राजा के पास गया और राजा से बोला, ‘आप बढ़ई को मारे’।

राजा बोला, ‘ मैं कोई तुम्हारा नौकर हूँ की बढ़ई को मारू ‘

तोता रानी के पास गया और बोला, ‘ रानी तुम राजा को छोड़ दो तो राजा बढ़ई से दाल निकालने के लिए कहे ‘

रानी बोली, ‘ तू भाग यहा से ‘

फिर तोता साप के पास गया और बोला, ‘ तुम रानी को डसों ‘

साप बोला, ‘ भाग यहा से ‘

तोता वहां से भगा और लाठी से बोला, ‘ तुम साप को मरो, फिर वह रानी को डसेगा, रानी राजा को छोड़ देगी, तो राजा बढ़ई को मारे तो बढई दाल निकाले ‘

तब लाठी बोला, ‘ चल भाग यहा से ‘

अब तोता आग के पास गया और बोला, ‘ लाठी को जलाओ ‘

आग ने भी उसको भगा दिया।

तब तोता पानी के पास गया और बोला, ‘ तुम आग को बुझाओ ‘

पानी ने भी तोते को भगा दिया।

फिर तोता हाथी के पास गया और कहा, ‘ तुम पानी को सोख लो ‘

हाथी ने कहा, मुझसे नही होगा और तोते को भगा दिया।

तोता चिटी के पास गया और कहा, ‘ तुम हाथी को काटो ‘

अब चिटी चली हाथी को काटने।

तब हाथी बोला, ‘ चिटी बहन तुम मुझे मत काटो मैं पानी सोखने जाता हूँ ‘

तब पानी बोला, ‘ हाथी जी मुझे मत सोखो मैं आग बुझाने जाती हूँ ‘

तब आग ने कहा, ‘ पानी मुझे मत बुझाओ, मैं जाती हूँ लाठी जलाने ‘

लाठी ने कहा, ‘ आग मुझे मत जलाओ, मैं जाता हूँ साप को मारने ‘

साप ने कहा, ‘ तुम मुझे मत मारो मैं जाता हूँ रानी को काटने ‘

रानी ने कहा,’ मुझे मत काटो मैं राजा को छोड़ देती हूँ ‘

राजा बोला, ‘ रानी तुम मुझको मत छोड़ो, मैं बढ़ई को कहने जाता हूँ ‘

राजा ने बढ़ई से कहा, ‘ जाओ खूंटे को चीरकार दाल निकाल दो ‘

बढ़ई ने खूंटा चीरकार दाल निकल दिया। तोता दाल खाकर शहर चला गया।

तो दोस्तों इस कहानी से हमे क्या सीखने को मिला, जी हाँ, कोशिश करने वालो की हार नही होता, कभी हमें हार नही माननी चाहिए। कामयाब होने के लिए हार का सामना करना सीखें।