मैंने एक 27 August 2016 को एक article लिखा था कि ‘ जब पति Importance न दे तो पत्नी क्या करे? ‘। जिसकी वजह से काफी महिलाओं का इसका फायदा हुआ पर ये कहने में मुझे बड़ा दुख होता है कि कुछ महिलाएं ऐसी भी है जिनके पति उन्हें बड़ा बेइज्जत, मार-पिट और झगड़ा करते हैं (pati jhagda, maar-pitai kare to kya karna chahiye)।

India में 70% महिलाएं अपने पति से इसी वजह से परेशान है। हर तरह की कोशिशों के बाद भी उनके पति सुधरने का नाम नहीं लेते। ऐसी परिस्तिथि में पत्नी पूरी तरह टूट जाती है। आज हम इसी विषय में चर्चा करेंगे ताकि आप अपने पति की हर एक हरकतों से निपट सके।

इस परिस्थिति का समाधान हमें एक ऐसे सुविचार से मिलता है जिन्हें हम समझते तो हैं पर अपनी जिंदगी के कभी नहीं उतारते। महात्मा गाँधी ने कहा है – पहले वो आपको नज़रअंदाज़ करेंगे, फिर आप पे हँसेंगे, फिर आपसे लड़ेंगे और आखिर में जित आपकी ही होगी।

महात्मा गाँधी जी ने ठीक ही कहा है, जिसे हम जानकर भी अनजान रहते हैं। आज का समाज ऐसा हो गया है कि उसे जल्द से जल्द कामयाबी की बुलंदी छूनी है। किसी भी काम को पूरा करने के लिए हम जल्दबाजी में अपना आपा खो बैठते हैं और होता ये है कि जो हमारे पास है उससे भी हम अलग हो जाते हैं। रिश्तों में आई दरार को भरने के लिए बहुत ज्यादा समझौते और समय की जरूरत होती है।

पति बहुत झगड़ा करता है क्या करूं? उपाय

समझौते का मतलब ये नहीं कि आप अपने पति की हर गलती पर उन्हें सुनाने लगे, बल्कि समझौते का मतलब ये है कि आप अपने आपको बदले। इस बात को समझने के लिए मैं आपको एक कहानी बताता हूँ जो आपके समस्या को कुछ हद तक सुलझाने में आपकी मदद करेगी।

पहले पढ़े और अपने रिश्तों को समझने कि कोशिश करे– रीना अपने ससुराल वालों से काफी परेशान थी। वो हमेशा यही सोचती कि कैसे अपने ससुराल वालों को सुधारे। वो अपनी सास से काफी तंग आ चुकी थी।

आये-दिन झगड़ा होना आम बात हो गई थी। उसकी सास हमेशा उसको ताना मारती और पति-पत्नी के बिच में झगड़ा लगाती। घर का माहौल को सुधारने के लिए रीना ने कई उपाय और तरकीब कर के हार गई पर उसकी सास सुधरने का नाम ही नहीं ले रही थी।

आखिरकार रीना ने अपने पति को कह ही दिया ‘अगर मेरे साथ रहना है तो अपनी माँ को समझा दो नहीं तो हम कही और रहने चलते हैं।‘ पर रीना के पति ने भी अपनी पत्नी कि बातों को नज़रअंदाज़ करते हुए कह दिया ‘तुम होती कौन हो मेरे और मेरे परिवार को तोड़ने वाली। ‘ रीना पूरी तरह टूट चुकी थी।

दोस्तों यहाँ मैं एक बात कहना चाहूँगा कि जब इंसान हार जाता है तो वो अपनी हार से बचने के लिए मुहं छिपाता है और रीना अपनी सास से हार चुक थी इसीलिए अपने पति को मनाने लगी कि हम घर छोड़ के कहीं और रहते हैं। लेकिन एक बात गौर करने कि है कि जितना हम अपनी परेशानियों से दूर भागेंगे उतना ही वो बढ़ती है। ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ समस्या ना हो, बाद में हमें अपने समस्या से निपटने की शक्ति होनी चाहिए।

रीना बिलकुल हार चुकी थी। आखिर में उसने अपने मायके जाने का फैसला ले लिए और अपने मायके चली गई। रीना ने सारी बात अपने पिता को बताई। उसके पिता पैसे से डॉक्टर थे और अपनी बेटी की मनोदशा को बहुत अच्छी तरह समझते थे। जब शादीशुदा बेटी मायके में वापस रहने आ जाती है तो समाज उसे बड़ी बुरी नजर से देखता है, जो की एक कड़वा सच है।

जब कोई पिता अपनी बेटी का हाथ किसी पराये को देता है तो उसके दिल में यही ख़्वाहिश होती है कि उसकी बेटी हमेशा खुश रहे। रीना की ये हालत उसके पिता को अंदर ही अंदर खाए जा रही थी।

एक दिन रीना अपने पिता से कहती है ‘अगर मेरी सास मर जाए तो सारी समस्या ही ख़तम हो जाएगी।‘ ये बात सुनकर रीना के पिता चौक गए, पर उन्होंने कुछ कहा नहीं। हर पिता चाहता है कि उसकी बेटी अपने ससुराल में रानी की तरह रहे पर आज का दौर ऐसा हो चला है की बहु रानी नहीं नौकरानी बन गई है।

रीना ने आखिर में फैसला ले लिया कि उसकी सास को वो मार देगी। उसने अपने पिता को ऐसी दावा देने को कहा जिससे इंसान धीरे-धीरे कमजोर होकर मरने लगे। अपनी बेटी की हालत देखकर पिता का दिल पसीज गया और उन्होंने अपने बेटी को एक पाउडर की शीशी दी और कहा की इसे रोज खाने के एक चुटकी देती रहे, 6 महीने के बाद उसकी सास कमजोर होकर मार जाएगी।

पर पिता की एक शर्त भी थी कि इस 6 महीने के दौरान अपनी सास से झगड़ा नहीं करना है, उसे अपनी माँ के समान इज़्ज़त देना है और चाहे कुछ भी हो जाए उसकी किसी भी बात का बुरा नहीं मानना है। रीना ने कुछ पल के लिए सोचा कि ‘जिंदगी भर की परेशानी से अच्छा है कि मैं 6 महीने तक अपनी सास की परेशानी झेलू

रीना ने अपने पिता से वादा किया कि चाहे कुछ भी हो जाए वो अपनी सास को कभी तकलीफ़ नहीं देगी। रीना ने अपने पिता से दवा ले कर अपने ससुराल लौट गई। हर इंसान को अपनी समस्या सुलझाने का एक आसान रास्ता चाहिए होता है।। चाहे वो सही हो या गलत बस समस्या से छुटकारा मिलना चाहिए।

रीना को भी अपनी समस्या से छुटकारा पाने का एक आसान रास्ता मिल चूका था। वो खुशी-खुशी अपनी सास की सेवा करने लगी। मन में यही सपने थे कि ‘ आखिर कार 6 महीने बाद मेरी सास से मुझे छुटकारा मिल जायेगा और मेरी सारी समस्या दूर हो जाएगी। ‘

रीना में अचानक आए ऐसे बदलाव को उसकी सास को बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी सास उसपर पहले से ज्यादा ज़ुल्म और अत्याचार करने लगी। पर रीना ने अपने पिता से किया हुआ वादा नहीं तोड़ा वो रोज अपनी सास के खाने में जहर मिलाती रही और अपनी सास की हर खरी-खोटी बात को खुशी-खुशी सुनती रही।

तिन महीने बीत जाने के बाद उसकी सास को लगने लगा कि उसकी बहु अच्छा होने का नाटक नहीं कर रही बल्कि वो सच में अच्छी बहु है। धीरे-धीरे रीना की सास में भी परिवर्तन आने लगे। अब रीना उसकी सास को अच्छी लगने लगी। कल तक जहाँ सास-बहु में आये-दिन लड़ाई-झगड़ा होता था वही आज दोनों एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे।

देखते-देखते 5 महीने बीत गए। अब रीना को पूरा यकीन हो चूका था कि उसकी सास सुधर गई है। अब वो सास-बहु के बीच में माँ-बेटी जैसा प्यार हो गया था। रीना अब अपनी सास को मरते हुए नहीं देखना चाहती थी, उससे जो गलती हुई वो समझ चुकी थी और वो उसे सुधारना चाहती थी।

वो अपने पिता के पास मायके गई और रोते हुए अपने पिता से कहा ‘ मेरी सास मुझे बहुत प्यार करती है, मैं उसे खोना नहीं चाहती प्लीज उसे मरने से बचा लीजिये। ‘ तब रीना के पिता ने कहा – फ़िक्र करने की कोई बात नहीं मैंने जो दवा तुम्हें दी थी वो जहर नहीं बल्कि चीनी का पाउडर था। ये बात सुनकर रीना के अपने पिता को गले से लगा लिए।

रीना के पिता ने अपनी बेटी के रिश्तों में मिठास लाने के लिए उसे जहर के नाम पर चीनी का पाउडर दिया था। जिसकी वजह से रीना अपने सास के दिल पर राज करने में कामयाब हो सकी। ऐसा कोई छोटा मार्ग नहीं होता जिसकी मदद से हम अपनी परेशानियों से पीछा छुड़ा सके। परेशानियां सभी के जीवन में होती है, किसी की छोटी तो किसी की बड़ी। बस हमे अपने परेशानियों से भागना नहीं चाहिए बल्कि उसका प्यार से सामना करना चाहिए।

रहीम दस जी ने ठीक ही कहा है

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि
जहां काम आवै सुई, कहा करै तलवारि

जहाँ जरुरत होती है प्रेम, स्नेह और भरोसे की वहां अगर हम क्रोध, गुस्सा और झगड़ा करेंगे तो हमारी समस्या कम होने की बजाय और भी बढ़ आयेगी। रिश्तों में प्यार लाना है तो दूसरों से उम्मीद मत करो, अपने आपको बदलो और आखिर में दूसरे को भी आपके लिए बदलना होगा।

जब बच्चा छोटा होता है तो वो अपनी आस-पास की चीजों को देख कर ही सब कुछ सीखता है। माता-पिता जैसा करते है उसकी छाप उसके बच्चों पर पड़ती है। अगर आपको आपके पति बहुत ज्यादा परेशान, बैज्जत और मारते-पिटते हैं तो आपको उन्हें एक छोटे बच्चे जैसा समझना होगा। आपको वही करना होगा जो आप अपने पति में चाहती हैं।

एक अच्छी माँ, अच्छी बहु, अच्छी ननद, अच्छी भाभी बनने की कोशिश करें। आप अपने आप ही एक अच्छी पत्नी भी बन जाएँगी। देखिये ससुराल में कोई आपके साथ हो या ना हो आपको अपने साथ होना चाहिए। हर इंसान का एक जमीर होता है जिसके बलबूते वो किसी भी समस्या को बड़े आसानी से सुलझा सकता है।

अपने जमीर को कभी मरने मत दीजिए, क्योंकि पहले वो आपको नज़रअंदाज़ करेंगे, फिर आप पे हसेंगे , फिर आपसे लड़ेंगे और आखिर में जित आपकी ही होगी।