35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी के फायदे, संभावित जोखिम, मां और बच्चे की सेहत, जरूरी मेडिकल जांच, सही खानपान और सुरक्षित गर्भावस्था के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां जानें।
आज के समय में कई महिलाएं अपनी शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत जीवन को व्यवस्थित करने के बाद मां बनने का फैसला करती हैं। इस कारण कुछ महिलाएं 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण की योजना बनाती हैं। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर देखभाल की मदद से इस उम्र में भी कई महिलाएं स्वस्थ गर्भावस्था और स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं।
हालांकि, 35 वर्ष के बाद गर्भधारण करते समय कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना जरूरी होता है। बढ़ती उम्र के साथ महिला की प्रजनन क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है और गर्भावस्था के दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना बढ़ सकती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि 35 वर्ष के बाद हर गर्भावस्था जोखिम भरी होती है। प्रत्येक महिला की सेहत, मेडिकल इतिहास और प्रजनन क्षमता अलग-अलग होती है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि 35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी के क्या फायदे हैं, किन जोखिमों की संभावना रहती है, गर्भधारण से पहले कौन-सी जांच जरूरी हैं और सुरक्षित गर्भावस्था के लिए किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।
35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी का क्या अर्थ है?
चिकित्सा क्षेत्र में 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में गर्भावस्था को पारंपरिक रूप से Advanced Maternal Age यानी अधिक मातृ आयु की गर्भावस्था कहा जाता है। यह शब्द डॉक्टरों को गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों का आकलन करने और उचित निगरानी की योजना बनाने में मदद करता है।
महिला की उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता में कमी आ सकती है। इसके कारण गर्भधारण करने में अधिक समय लग सकता है और गर्भपात या कुछ क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप और गर्भावधि मधुमेह जैसी समस्याओं की संभावना भी बढ़ सकती है।
लेकिन केवल उम्र के आधार पर किसी महिला की गर्भावस्था का परिणाम तय नहीं किया जा सकता। कई महिलाएं 35, 38 या 40 वर्ष के बाद भी बिना बड़ी जटिलताओं के स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं। सही समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना और नियमित जांच करवाना सबसे महत्वपूर्ण है।
35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी के 7 प्रमुख फायदे
1. भावनात्मक परिपक्वता
उम्र के साथ कई लोगों को अपनी भावनाओं, जिम्मेदारियों और रिश्तों को बेहतर ढंग से समझने का अनुभव मिलता है। इससे गर्भावस्था और बच्चे के पालन-पोषण के दौरान आने वाली चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, भावनात्मक परिपक्वता हर व्यक्ति में अलग होती है और यह केवल उम्र पर निर्भर नहीं करती।
2. आर्थिक स्थिति बेहतर होने की संभावना
कुछ महिलाएं 35 वर्ष तक अपनी शिक्षा पूरी कर चुकी होती हैं और उनके पास स्थिर नौकरी या बेहतर आर्थिक स्थिति हो सकती है। इससे गर्भावस्था के खर्च, अस्पताल, पौष्टिक भोजन और बच्चे की शुरुआती जरूरतों की योजना बनाना आसान हो सकता है।
यह फायदा सभी के लिए समान नहीं होता, क्योंकि आर्थिक परिस्थितियां हर परिवार में अलग-अलग होती हैं।
3. परिवार नियोजन का सोच-समझकर लिया गया निर्णय
कुछ दंपति इस उम्र तक अपने रिश्ते, करियर, रहने की व्यवस्था और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। इससे बच्चे के जन्म के बाद जिम्मेदारियों को साझा करने और भविष्य की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।
4. बेहतर स्वास्थ्य जागरूकता
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक महिलाएं गर्भधारण से पहले अपनी जीवनशैली, पोषण, दवाओं और मेडिकल इतिहास पर ध्यान दे सकती हैं। डॉक्टर से पहले ही परामर्श लेने से मधुमेह, थायरॉइड या उच्च रक्तचाप जैसी पहले से मौजूद समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
5. साथी और परिवार का सहयोग
कुछ परिवारों में इस उम्र तक जीवनसाथी और परिवार के सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों को लेकर बेहतर समझ विकसित हो जाती है। भावनात्मक और व्यावहारिक सहयोग गर्भावस्था के दौरान तनाव कम करने तथा प्रसव के बाद देखभाल में उपयोगी हो सकता है।
6. बच्चे के पालन-पोषण की बेहतर योजना
अनुभव, समय प्रबंधन और आर्थिक योजना की मदद से कुछ माता-पिता बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों के लिए पहले से तैयारी कर सकते हैं।
7. सही चिकित्सा मार्गदर्शन के साथ स्वस्थ गर्भावस्था की संभावना
उम्र 35 वर्ष से अधिक होने के बावजूद स्वस्थ गर्भावस्था संभव है। गर्भधारण से पहले परामर्श, जरूरी जांच, संतुलित आहार और नियमित प्रसवपूर्व देखभाल से कई जोखिमों की पहचान और प्रबंधन किया जा सकता है।
ध्यान दें: ये संभावित फायदे हैं, निश्चित परिणाम नहीं। गर्भावस्था की सुरक्षा मुख्य रूप से महिला की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सा देखभाल और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी के 7 संभावित जोखिम
1. गर्भधारण करने में कठिनाई
महिला की उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता कम होती जाती है। 35 वर्ष के बाद प्रजनन क्षमता में गिरावट अधिक स्पष्ट हो सकती है। इसलिए गर्भधारण करने में पहले की तुलना में अधिक समय लग सकता है।
यदि महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है और छह महीने तक नियमित असुरक्षित यौन संबंध के बावजूद गर्भधारण नहीं होता, तो प्रजनन विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है। यदि मासिक धर्म अनियमित है या पहले से कोई प्रजनन संबंधी समस्या है, तो इससे पहले भी डॉक्टर से मिलना चाहिए।
2. गर्भपात की संभावना बढ़ना
उम्र के साथ अंडों में क्रोमोसोम संबंधी बदलाव होने की संभावना बढ़ती है। इससे कुछ गर्भधारण शुरुआती चरण में ही समाप्त हो सकते हैं। गर्भपात के कई कारण होते हैं और हर गर्भपात को महिला की जीवनशैली या किसी गलती से जोड़ना सही नहीं है।
गर्भावस्था के दौरान रक्तस्राव या तेज पेट दर्द होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
3. गर्भावधि मधुमेह का जोखिम
गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes) वह स्थिति है जिसमें गर्भावस्था के दौरान रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। बढ़ती उम्र के साथ इसका जोखिम बढ़ सकता है।
अनियंत्रित मधुमेह से बच्चे का वजन अधिक होने, प्रसव में कठिनाई और मां-बच्चे से जुड़ी अन्य जटिलताओं की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर की जांच, संतुलित भोजन और सुरक्षित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण हैं।
4. उच्च रक्तचाप और प्रीक्लेम्पसिया
35 वर्ष के बाद गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप और प्रीक्लेम्पसिया का जोखिम बढ़ सकता है। प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें आमतौर पर उच्च रक्तचाप के साथ शरीर के कुछ अंग प्रभावित हो सकते हैं।
तेज सिरदर्द, नजर धुंधली होना, ऊपरी पेट में तेज दर्द या अचानक चेहरे और हाथों में सूजन जैसे लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। हर सूजन खतरनाक नहीं होती, लेकिन ऐसे लक्षणों की जांच जरूरी है।
5. क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों की संभावना
उम्र बढ़ने के साथ डाउन सिंड्रोम जैसी कुछ क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों की संभावना बढ़ जाती है। इसका कारण अंडों में क्रोमोसोम के विभाजन से जुड़ी त्रुटियों की संभावना का बढ़ना है।
डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान उपलब्ध स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक जांच के विकल्प समझा सकते हैं। स्क्रीनिंग जांच जोखिम का अनुमान देती है, जबकि कुछ डायग्नोस्टिक जांच अधिक निश्चित जानकारी दे सकती हैं। किसी भी जांच को करवाने से पहले उसके लाभ, सीमाएं और संभावित जोखिम समझना महत्वपूर्ण है।
6. समय से पहले प्रसव और अन्य जटिलताएं
कुछ मामलों में 35 वर्ष के बाद समय से पहले प्रसव, कम जन्म वजन या प्लेसेंटा से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर महिला को इन समस्याओं का सामना करना पड़े।
नियमित अल्ट्रासाउंड, डॉक्टर की सलाह और गर्भावस्था के लक्षणों पर ध्यान देने से जरूरी समस्याओं की समय रहते पहचान करने में मदद मिल सकती है।
7. सिजेरियन डिलीवरी की संभावना
अधिक मातृ आयु में कुछ महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी की आवश्यकता पड़ सकती है। इसका कारण गर्भावस्था में होने वाली जटिलताएं, बच्चे की स्थिति, प्रसव की प्रगति या अन्य मेडिकल परिस्थितियां हो सकती हैं।
केवल 35 वर्ष से अधिक उम्र होने का अर्थ यह नहीं है कि सिजेरियन डिलीवरी अनिवार्य है। सामान्य प्रसव या सिजेरियन का निर्णय मां और बच्चे की स्थिति के आधार पर डॉक्टर लेते हैं।
गर्भधारण से पहले कौन-सी जांच करवानी चाहिए?
35 वर्ष के बाद गर्भधारण की योजना बनाते समय डॉक्टर से प्री-कन्सेप्शन काउंसलिंग करवाना उपयोगी है। इसमें महिला की उम्र, मासिक धर्म, पिछली गर्भावस्थाओं, पारिवारिक इतिहास और पहले से मौजूद बीमारियों का आकलन किया जाता है।
डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार निम्न जांचों की सलाह दे सकते हैं:
ब्लड प्रेशर: उच्च रक्तचाप की पहचान के लिए।
ब्लड शुगर: मधुमेह या उसके जोखिम का आकलन करने के लिए।
थायरॉइड जांच: लक्षणों या मेडिकल इतिहास के आधार पर।
हीमोग्लोबिन और अन्य रक्त जांच: एनीमिया या अन्य समस्याओं की जांच के लिए।
संक्रमण और टीकाकरण की समीक्षा: जरूरत के अनुसार जांच तथा टीकों की स्थिति का मूल्यांकन।
दवाओं की समीक्षा: नियमित दवाओं और सप्लीमेंट की गर्भावस्था में सुरक्षा समझने के लिए।
प्रजनन क्षमता का मूल्यांकन: आवश्यकता होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ या फर्टिलिटी विशेषज्ञ द्वारा।
हर महिला को सभी जांचों की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार उचित जांचों का चयन करेंगे।
35 वर्ष के बाद स्वस्थ गर्भावस्था के लिए 10 जरूरी सावधानियां
1. गर्भधारण से पहले डॉक्टर से मिलें
गर्भधारण की कोशिश शुरू करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। यदि आपको मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड की समस्या या कोई अन्य पुरानी बीमारी है, तो गर्भधारण से पहले उसे नियंत्रित करने की योजना बनाएं।
2. फोलिक एसिड का सेवन करें
गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं को आमतौर पर रोजाना 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है, जिसे गर्भधारण से कम से कम एक महीने पहले शुरू करना उपयोगी होता है। यह बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के शुरुआती विकास से जुड़े कुछ जन्म दोषों का जोखिम कम करने में मदद करता है।
कुछ महिलाओं को अधिक खुराक की आवश्यकता हो सकती है। अधिक मात्रा स्वयं से न लें; डॉक्टर से सही खुराक पूछें।
3. संतुलित और पौष्टिक आहार लें
अपने भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज, दूध या उपयुक्त विकल्प, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन बी12 की जरूरत व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
किसी भी सप्लीमेंट को बिना जरूरत या डॉक्टर की सलाह के अधिक मात्रा में न लें।
4. स्वस्थ वजन बनाए रखें
गर्भधारण से पहले बहुत कम या अधिक वजन होने पर कुछ स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि से स्वस्थ वजन बनाए रखने का प्रयास करें। गर्भावस्था के दौरान वजन घटाने के लिए कठोर डाइट न अपनाएं; वजन बढ़ने की उचित सीमा डॉक्टर से समझें।
5. नियमित और सुरक्षित व्यायाम करें
डॉक्टर की अनुमति के अनुसार पैदल चलना, हल्का व्यायाम, योग या गर्भावस्था के अनुकूल गतिविधियां फायदेमंद हो सकती हैं। यदि पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या गर्भावस्था में जटिलता है, तो व्यायाम की उपयुक्तता डॉक्टर से पूछें।
6. धूम्रपान और शराब से बचें
गर्भधारण की कोशिश के दौरान और गर्भावस्था में धूम्रपान, तंबाकू और शराब से बचना चाहिए। ये मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। कैफीन का सेवन भी सीमित रखें और डॉक्टर से उपयुक्त मात्रा पूछें।
7. नियमित प्रसवपूर्व जांच करवाएं
गर्भावस्था की पुष्टि होते ही डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लें। निर्धारित समय पर जांच, अल्ट्रासाउंड और रक्त परीक्षण करवाएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चे के विकास और मां के स्वास्थ्य की निगरानी करें।
8. जरूरी स्क्रीनिंग और जांच के विकल्प समझें
डॉक्टर आपको गर्भावस्था के दौरान क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों की स्क्रीनिंग, अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर डायग्नोस्टिक जांचों के बारे में बता सकते हैं। जांच का चुनाव गर्भावस्था के सप्ताह, मेडिकल इतिहास और आपकी प्राथमिकताओं के आधार पर होना चाहिए।
9. मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें
गर्भधारण में देरी, जांचों की चिंता या गर्भावस्था के जोखिमों के कारण तनाव हो सकता है। अपने साथी और परिवार से खुलकर बात करें। पर्याप्त नींद लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लें।
10. आपातकालीन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
गर्भावस्था के दौरान भारी रक्तस्राव, तेज या लगातार पेट दर्द, बेहोशी, सांस लेने में कठिनाई, तेज सिरदर्द, नजर में बदलाव या बाद के महीनों में बच्चे की हलचल स्पष्ट रूप से कम होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। गंभीर लक्षणों में नियमित अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें।
35 वर्ष के बाद गर्भधारण करने में कितना समय लग सकता है?
हर महिला की प्रजनन क्षमता अलग होती है, इसलिए गर्भधारण में लगने वाला समय निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है। कुछ महिलाएं जल्दी गर्भधारण कर लेती हैं, जबकि कुछ को कई महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।
यदि उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है और छह महीने की कोशिश के बाद भी गर्भधारण नहीं हुआ है, तो डॉक्टर से मिलना उचित है। उम्र 40 वर्ष से अधिक होने पर या मासिक धर्म में अनियमितता, एंडोमेट्रियोसिस, पहले से ज्ञात प्रजनन समस्या या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर पहले ही मूल्यांकन की सलाह दे सकते हैं।
प्रजनन क्षमता की जांच केवल महिला की नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार दोनों पार्टनर की हो सकती है। समय पर परामर्श मिलने से उपयुक्त उपचार विकल्पों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।
क्या 35 वर्ष के बाद IVF की जरूरत पड़ती है?
नहीं, 35 वर्ष के बाद हर महिला को IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन की जरूरत नहीं होती। कई महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करती हैं। IVF या अन्य फर्टिलिटी उपचार की आवश्यकता उम्र के साथ-साथ अंडोत्सर्जन, फैलोपियन ट्यूब, शुक्राणुओं की गुणवत्ता, मेडिकल इतिहास और गर्भधारण की अवधि पर निर्भर करती है।
यदि गर्भधारण में कठिनाई हो रही है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लें। वे जांच के परिणामों के आधार पर प्राकृतिक रूप से कोशिश जारी रखने, दवाओं, IUI या IVF जैसे विकल्पों के लाभ और सीमाएं समझा सकते हैं।
किसी उपचार की सफलता की गारंटी नहीं होती। इसलिए निर्णय लेने से पहले संभावित खर्च, समय, सफलता की संभावना और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी लेना जरूरी है।
क्या 35 वर्ष के बाद सामान्य प्रसव संभव है?
हां, 35 वर्ष के बाद सामान्य प्रसव संभव है। केवल उम्र के आधार पर सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय नहीं लिया जाता। डॉक्टर बच्चे की स्थिति, मां की सेहत, प्रसव की प्रगति और गर्भावस्था में मौजूद अन्य जोखिमों का मूल्यांकन करते हैं।
यदि मां और बच्चा स्वस्थ हैं और कोई चिकित्सकीय बाधा नहीं है, तो सामान्य प्रसव एक विकल्प हो सकता है। लेकिन जब सिजेरियन मां या बच्चे की सुरक्षा के लिए जरूरी हो, तब डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।
इसलिए गर्भावस्था की शुरुआत से ही प्रसव के तरीके को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर के साथ मिलकर सुरक्षित योजना बनाना बेहतर है।
निष्कर्ष
35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी आज के समय में असामान्य नहीं है। इस उम्र में मां बनने के कई सकारात्मक पहलू हो सकते हैं, जैसे बेहतर जीवन अनुभव, परिवार नियोजन की स्पष्टता और आर्थिक तैयारी। साथ ही, प्रजनन क्षमता में कमी, गर्भपात, गर्भावधि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कुछ क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
हालांकि, उम्र अकेले गर्भावस्था का परिणाम तय नहीं करती। गर्भधारण से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना, फोलिक एसिड की उचित खुराक शुरू करना, पौष्टिक भोजन खाना, सुरक्षित व्यायाम करना और नियमित प्रसवपूर्व जांच करवाना महत्वपूर्ण कदम हैं।
यदि आप 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो डरने के बजाय सही जानकारी और व्यक्तिगत मेडिकल सलाह के साथ आगे बढ़ें। हर महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए अपनी जरूरतों के अनुसार डॉक्टर के मार्गदर्शन में निर्णय लें।
महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं। गर्भधारण या गर्भावस्था से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।
अक्सर पूछे जाने वाले 5 सवाल (FAQs)
1. क्या 35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी सुरक्षित है?
हां, 35 वर्ष के बाद भी स्वस्थ गर्भावस्था संभव है। हालांकि, कुछ जोखिम बढ़ सकते हैं। गर्भधारण से पहले परामर्श, नियमित जांच और उचित स्वास्थ्य देखभाल से जोखिमों की पहचान तथा प्रबंधन में मदद मिलती है।
2. क्या 35 वर्ष के बाद प्राकृतिक रूप से गर्भधारण हो सकता है?
हां, कई महिलाएं 35 वर्ष के बाद प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करती हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ प्रजनन क्षमता कम हो सकती है। 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में छह महीने कोशिश करने के बाद गर्भधारण न होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना उचित है।
3. 35 वर्ष के बाद गर्भावस्था में कौन-से जोखिम बढ़ते हैं?
इस उम्र में गर्भधारण में कठिनाई, गर्भपात, गर्भावधि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, प्रीक्लेम्पसिया और कुछ क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों की संभावना बढ़ सकती है। जोखिम हर महिला में अलग होता है।
4. क्या 35 वर्ष के बाद बच्चे में जन्म दोष का खतरा बढ़ता है?
उम्र के साथ कुछ क्रोमोसोम संबंधी स्थितियों, जैसे डाउन सिंड्रोम, की संभावना बढ़ सकती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बच्चे में जन्म दोष होना निश्चित है। डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान उपयुक्त स्क्रीनिंग और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों के विकल्प समझा सकते हैं।
5. 35 वर्ष के बाद गर्भधारण की योजना बनाते समय सबसे जरूरी क्या है?
सबसे जरूरी है गर्भधारण से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना, स्वास्थ्य समस्याओं की जांच करवाना, फोलिक एसिड की उचित खुराक लेना, संतुलित आहार अपनाना, धूम्रपान और शराब से बचना तथा गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच करवाना।
