शादी से जुड़ी 5 झूठ जो आप नहीं जानते

शादी को लेकर कुछ ऐसी बाते है, जो हमारे मन मे बैठ गई है. हमें लगता है कि सालो से चली आरही हमारी ये सोच सही है, जबकि हक़ीकत कुछ अलग ही होती है.हम ऐसा मानते है कि शादी बिगड़े हुए इंसान को सुधारकर उसे ज़िम्मेदार बना देती है और स्त्री को संपूर्णता प्रदान करती है, लेकिन आप जब शादी करते हो और इन पारंपरिक बातो से बातो से हक़ीकत को बिल्कुल अलग पाते है, तो सोच मे पड़ जाते है.

शादी से जुड़ी 5 झूठ जो आप नहीं जानते

आपके साथ ऐसा ना हो, इसलिए हम यहा ‘ अच्छीबात ‘ मे बता रहे है, शादी से जुड़ी ऐसी ही कुछ झूठी बातें जो लोग अक्सर मन मे पाले रहते है.

शादी से जुड़ी 5 झूठ

1. अब मेरा अकेलापन दूर हो जाएगा

सबसे पहले यह जान ले कि अकेलेपन का शादी से कोई लेना-देना नही. अगर आपका स्वाभाव ही नीरस है, तो अपने साथी को कभी कंपनी नही दे पाएँगे. शादी के बाद भी ना तो आपकी और ना ही आपके साथी की तनहाई दूर हो पाएगी. कई महिलाए कुछ सालो बाद सिर्फ़ इसलिए तलाक़ लेती है कि उनके पति साथ होकर भी उनके साथ नही होते ओर उन्हे अकेलापन महसूस होता है.

2. अब मैं जब चाहू से-क्स कर सकता हू

यह सबसे बड़ी ग़लतफैयमी होती है कि शादी दरअसल क़ानूनी रूप से से-क्स करने का लाइसेन्स होती है. शादी के बाद भी पार्ट्नर की मर्ज़ी के बिना से-क्स क़ानूनन अपराध ही माना जाता है. वैसे भी हर किसी की से-क्स की चाहत और ज़रूरत अलग-अलग ही होती है, लेकिन शादी के बाद आपको अपने पार्ट्नर की ज़रूरत का ख़याल रखना चाहिए.

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से-क्स से ना सिर्फ़ मानसिक, बल्कि भावनात्मक और शारीरिक संतुष्टि भी मिलती है, ऐसे मे अगर पार्ट्नर स-क्स मे दिलचस्पी ना ले, तो ज़ोर-ज़बरदस्ती करने की बजाए अपने रीलेशन पर ध्यान दे. उसमे एनर्जी लाए और रोमॅन्स करे, ताकि पार्ट्नर मे भी से-क्स की चाह जागृत हो और आपका रिश्ता और मजबूत हो.

3. अब मुझे काम नही करना पड़ेगा

यह बहुत ही अलग धरना है. लड़किया सोचती है कि शादी के बाद ना सिर्फ़ उनकी आर्थिक ज़िम्मेदारी उनके पति की है, बल्कि ग़ैरज़रूरी ख्वाहीसो को पूरी करना भी उनके पति का ही फ़र्ज़ है. इस सोच के साथ अगर आप शादी करेंगे, तो नतीजा यही होगा कि मनमाने तरीके से खर्च ना कर पाने के कारण आप हताश-निराश हो जाएँगी.

बेहतर होगा की अपनी finatial sequrity को अपनी ही ज़िम्मेदारी समझे और पति को सहयोग करे और खुद भी आत्मनिर्भर बने.

4. सास-ससुर से भी अपने मात-पिता जैसा ही प्यार मिलेगा

हमें शुरू से ही सिखाया जाता है कि ससुराल जाकर सबका दिल जितना है और बदले मे वो भी तुम्हे अपनी बेटी समझेगे, लेकिन कही ना कही यह बात भी सच है कि आपको उनसे बहुत ज़्यादा उम्मीद नही रखनी चाहिए, क्योंकि तुरंत आपको अपना लेना उनके लिए भी आसान नही होगा. उन्हें वक़्त दे, रेस्पेक्ट दे और बदले मे बहुत ज़्यादा उम्मीद ना करे, तो शायद आपको उम्मीद से अधिक मिल जाएगा.

5. बच्चा होने के बाद सब ठीक हो जाएगा

हमारे समाज मे शादी के बाद बच्चा होना भी एक सामाजिक परंपरा या ज़िम्मेदारी को पूरा करना माना जाता है, लेकिन कई बार कपल्स ये ज़िम्मेदारी उठाने के लिए तय्यार नही होते, पर परिवारिक या सामाजिक दबाव के चलते परिवार बढ़ा लेते है.

ख़ासकर महिलाए यह सोचकर बच्चे का निर्णय जल्दी ले लेती है कि कही समाज उन्हे बांझ ना समझे, लेकिन यह ग़लत है. बच्चे का निर्णय तभी ले, जब आप दोनो खुद इसके लिए मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से तैयार हो, वरना बेमन से या दबाव मे जो बच्चा आएगा, उसका स्वागत और पालन-पोषण भी बेमान से ही होगा.

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