जीवन को नई दिशा देने के लिए 50 चाणक्य निति

असंभव शब्द का प्रयोग केवल कायर लोग करते हैं,
बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति अपना मार्ग खुद प्रशस्त करते हैं।

काम चाहे छोटा हो या बड़ा, एक बार हाथ में लेने के बाद उसे छोड़ना नहीं चाहिए।
अपनी पूरी लगन और सामर्थ्य से उसे पूरा करना चाहिए।
यह गुण हमें सिंह से चाहिए, जो एक बार पकड़े हुए शिकार को कदापि नहीं छोड़ता।

क्या पता किस्मत में लिखा हो कि कोशिश से ही मिलेगा।

चाणक्य निति

जिस तरह सोने का परिक्षण उसे घिसकर, काटकर, तपा कर और पिट कर की जाती है
उसी तरह मनुष्य का परिक्षण भी उसकी त्याग, आचरण, गुण और उसके व्यवहार से की जानी चाहिए।

केवल सहस के भरोसे किसी कार्य को पूरा नहीं किया जा सकता।

दुष्ट इंसान की मीठी बातों पर कभी भरोसा मत करो।
वह अपना मूल स्वभाव कभी नहीं छोड़ सकता,
जैसे सेर कभी हिंसा नहीं छोड़ सकता।

मूर्खों की तारीफ सुनने से बुद्धिमान से डाट सुनना ज्यादा बेहतर है।

किसी भी व्यक्ति की वर्तमान स्थिति को देखकर भविष्य का मजाक न उड़ाओ
क्योंकि कल में इतनी शक्ति है कि वह एक मामूली कोयले के टुकड़े को हिरा में तबदील कर सकता है।

चाणक्य विचार

असली मनुष्य का वर्तमान और भविष्य नहीं होता।

जिसने अन्यपूर्वक धन इकट्ठा किया है और अकड़ कर सदा सिर को उठाए रखा है।
ऐसे लोग से सदा दूर रहो।
ऐसे लोग खुद पर भी बोझ होते हैं, इन्हें शांति कहीं नहीं मिलती।

आंख के अंधे को दुनिया नहीं दिखती,
काम के अंधे को विवेक नहीं दीखता,
मद के अंधे को अपने में श्रेष्ठ नहीं दीखता और
स्वार्थी को कहीं भी दोष नहीं दीखता।

कोई कम शुरू करने से पहले, खुद से तीन प्रश्न कीजिए –
मैं ये क्यों कर रहा हूं?
इसके परिणाम क्या हो सकते हैं? और
क्या मैं सफल होऊंगा?
और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जाएँ,
तभी आगे बढ़ें।

हमें भुत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, न ही भविष्य के बारे में चिंता होनी चाहिए।
विवेकवान व्यक्ति वर्तमान में जीते हैं।

जैसे ही भय आपके करीब आये, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिए।

खुद का अपमान कराके जीने से तो अच्छा मर जाना है
क्योंकि प्राणों के त्यागने से केवल एक ही बार कष्ट होता है
पर अपमानित होकर जीवित रहने से आजीवन दुख होता है।

मूर्खों से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए,
क्योंकि इससे केवल आप अपना ही समय नष्ट करेंगे।

समझदार व्यक्ति को दूसरों के बल पर साहस नहीं करना चाहिए।

बुद्धि से पैसा कमाया जा सकता है ना की पैसे से बुद्धि हासिल की जा सकती है।

सज्जन व्यक्ति बहुत छोटे उपकार को भी पर्वत के समान बड़ा मानकर चलता है।

हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ होता है,
कोई भी मित्रता ऐसी नहीं जिसके पीछे स्वार्थ न छिपा हो,
यह जीवन का एक कड़वा सच है।

जो धन अति कष्ट से प्राप्त हो, धर्म का त्याग करने से प्राप्त हो,
शत्रुओं के सामने झुकाने से प्राप्त हो,
इस प्रकार के धन को प्राप्त करने की चेष्ठ नहीं रखनी चाहिए।

जो व्यक्ति शक्ति न होते हुए भी मन से हार नहीं मानता है,
उसको दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती।

संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है,
लोभ जैसा कोई बीमारी नहीं है और दया जैसा कोई पूण्य नहीं है।

किसी भी व्यक्ति को बहुत इमानदार नहीं होना चाहिए,
सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं।

सबसे बड़ा गुरु मंत्र है –
कभी भी अपने राज दूसरों को मत बताएं। ये आपको बरबाद कर देगा।

सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज होता है,
पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलाती है।

व्यक्ति अपने गुणों से ऊपर उठता है, ऊँचे स्थान पर बैठने से नहीं।

इतिहास गवाह है कि -जितना नुकसान हमें दुर्जनों की दुर्जनता से नही हुआ,
उससे ज्यादा सज्जनों की निष्क्रियता से हुआ।

अपने कार्य की शीघ्र सिद्धि चाहने वाला व्यक्ति नक्षत्रों की प्रतीक्षा नहीं करता।

क्या पता किस्मत में लिखा हो की कोशिश से ही मिलेगा।

किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले यह सोच समझ लेना चाहिए कि
आप अपने बलबूते उस काम को पूरा कर सकते हैं या नहीं।

जब आपका बच्चा जवानी की दहलीज पर पैर रखे यानि की सोलह-सतरा वर्ष को होने लगे
तब आप संभल जाए और उसके साथ एक दोस्त की तरह व्यवहार करें।
यह बहुत जरुरी है।

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है, एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है।

सांप को दूध पिलाने से विष ही बढ़ता है, न की अमृत।

इन बातों पर अवश्य गौर करना चाहिए – सही समय, सही मित्र, सही ठिकाना,
पैसे कमाने के सही साधन, पैसे खर्च करने के सही सरीके और आपके ऊर्जा श्रोत।

सेवक को तब परखो जब वो काम ना कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई में,
मित्र को संकट में, और पत्नी को घोर विपत्ति में।

मुर्ख से मूर्खों जैसी ही भाषा बोलनी चाहिए।

पृथ्वी पर केवल तीन ही रत्न है – जल, अन्न और मधुर वचन।
बुद्धिमान व्यक्ति इनकी समझ रखते है, पर मुर्ख लोग पत्थर के टुकड़े को ही रत्न समझते हैं।

पहले पांच सालों में अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखें।
अगले पांच साल में उन्हें डांट-डपट के रखे। जब वो सोलह साल का हो जाए तो
उसके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करें।
आपके व्यस्क बच्चे ही आपके सबसे अच्छे मित्र है।

सभी प्रकार के भय में से बदनामी का भय सब से बड़ा होता है।

तपस्या हमेशा अकेले किया जाना चाहिए, अध्यन और अभ्यास दो लोग कर सकते हैं।
गायन तीन लोग कर सकते हैं, कृषि चार लोगों को मिलकर करना चाहिए और
युद्ध हमेशा अनेक लोगों के साथ मिलकर करना चाहिए।

कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिए जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों,
ऐसे मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी।

कुबेर भी यदि आय से अधिक खर्च करे तो निर्धन हो जाता है।

दुष्टों और काँटों से बचने के केवल दो ही उपाय हैं,
जूते से उन्हें कुचल डालना या उनसे दूर रहना।

इस बात को व्यक्त मत होने दीजिये कि आपने क्या करने के लिए सोचा है,
बुद्धिमान से इसे रहस्य बनाये रखिये और इस काम को करने के लिए दृढ़ रहिए।

जो स्त्री पराए घर में रहती है, जो पेड़ नदी किनारे रहते है,
जो राजा मंत्री न रखता हो, ये तीनों ही बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं।

अगर आप किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी को छोड़ देते हैं तो इस बात पर हैरान मत हो,
अगर वह व्यक्ति आपको किसी और के लिए छोड़ दे।

बुरे राजा के राज में न तो जनता सुखी होगी और न ही उससे कभी जनता का भला होगा।
बुरे राजा से तो अच्छा है कि राजा न ही हो।

जो तुम्हारी बात सुनते हुए इधर-उधर देखे,
उस पर कभी विश्वास न करो।

किसी भी कार्य को कल पर नहीं छोड़ना चाहिए,
अगले पल क्या हो जाए, कौन जनता है।

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