घमंड का फल – Motivational story in Hindi

घमंड का फल। एक जंगल में एक बया चिड़ियाँ रहती थी। बया को शानदार घोसला बनाने की काला आती है। वह घास के छोटे-छोटे तिनकों की सहायता से एक नदी के किनारे बड़ा सुन्दर और मजबूत घोंसला बनाती थी।

एक बार जंगल में घोंसला बनाने की प्रतियोगिता हुई। जंगल के बहुत से पक्षियों ने बया की तरह सुन्दर घोंसला बनाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं बना पाए। इससे बया घमंडी हो गयी। बया का घमंड देख कर जंगल के पशु-पक्षी उससे चिढ़ने लगे और उससे दूर रहने लगे।

बया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह पहले से ज्यादा घमंडी हो गयी। धीरे-धीरे उसमे एक नई आदत पैदा हो गयी। वह अपने आपको बड़ा ज्ञानी समझने लगी। वह जंगल के पशु-पक्षियों के पास जाती और उन्हें तरह-तरह के उपदेश देने लगती।

घमंड का फल – Motivational story in Hindi

जंगल के पशु-पक्षी बड़े समझदार थे। वे बया के उपदेशों पर कोई ध्यान नहीं देते थे और अपने-अपने काम करते रहते थे। बया मूर्ख थी। वह समझती थी कि जंगल के पशु-पक्षियों पर उसके उपदेशों का प्रभाव पड़ रहा है। और वे उन्ही उपदेशों से प्रभावित होकर काम करने लगे हैं।

धीरे-धीरे बया की हिम्मत बढ़ने लगी  पहले वह छोटे-छोटे पशु-पक्षियों को उपदेश देती थी, किन्तु कुछ समय बाद वह बड़े-बड़े जीवों को उपदेश देने लगी।

एक दिन की बात है। जंगल में जोरदार बरसात हो रही थी। चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। आसमान में रह-रह कर बिजली चमक उठती और बादल गरजने लगते थे।

धीरे-धीरे रात का अंधेरा होने लगा। पानी अभी भी बरस रहा था। जंगल में सभी पशु-पक्षी पानी से परेशान थे। उन्हें दिनभर से कोई भोजन भी नहीं मिला था। भूख के मारे सबकी हालत खराब थी। कुछ पक्षियों के घोंसले पानी में बह गये थे और वे पेड़ की डालियों पर बैठे-बैठे भींग रहे थे।

बया सब कुछ देख रही थी और खुश हो रही थी। उसे कोई परेशानी नहीं थी। उसका घोंसला पूरी तरह सुरक्षित था। उसके घोंसले में इतना भोजन था कि उसने खा लिया था और अपने बच्चों को भी खिला दिया था। बया बहुत खुश थी। पानी अभी भी बरस रहा था।

बन्दर पेड़ की एक डाली पर बैठा भींग रहा था। उसने सुबह से कुछ भी नहीं खाया था, वह बहुत भूखा था।

बया ने बन्दर को देखा तो बोल पड़ी – अरे! बन्दर भाई, तुम तो बड़े हट्टे-कट्टे हो। एक घर बना लेते तो इस तरह भीगना न पड़ता।

बन्दर को बया की बात बहुत बुरी लगी, लेकिन उसने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

बया की हिम्मत बढ़ी। उसने फिर से उपदेश आरम्भ कर दिया – बन्दर भाई, आलस अच्छी चीज नहीं। ईश्वर ने तुम्हें मजबूत हाथ-पैर दिये हैं। तुम बड़े आराम से घर बना सकते थे। तुमने घर न बनाकर बहुत बड़ी भूल की है। इसीलिए आज तुम्हें परेशान होना पड़ रहा है।

बन्दर बड़ी देर से बया की बकबक सुन रहा था। बया चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी। अचानक बन्दर को गुस्सा आ गया। वह बड़ी तेजी से उठा और जाकर उस डाल को झकझोरने लगा, जिस पर बया का घोंसला था।

बया के घोंसले में भूचाल आ गया। कुछ ही देर में बच्चों सहित बया का घोसला नहीं में जा गिरा।

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