60 दिन का महीना – Akbar Birbal Story in Hindi

By | February 17, 2017
60 दिन का महीना - Akbar Birbal Story in Hindi

60 दिन का महीना – Akbar Birbal Story in Hindi

अकबर बादशाह का दरबार लगा हुआ था . वे राज-काज के काम निपटाकर हमेशा की तरह दरबारियों से बातें कर रहे थे .

अचानक उनके मन में एक विचार आया और दरबारियों से मुखातिब होकर बोले . ‘ एक महिना तीस दिन का होता है . इसमें कितने सारे काम करने पड़ते हिं , अगर महीना 60 दिन का कर दिया जाए तो कैसा रहेगा ? ‘

 

दरबारियों ने एक-दुसरे की तरफ देखा . फिर सभी ने बादशाह की बात का समर्थन किया . ‘ जहाँपनाह , आपका कहना बिल्कुल सहि है . तीस दिन का महिना सचमुच बहुत छोटा है . महीना तो 60 दिन का ही होना चाहिए . ‘

बीरबल अपने आसन पर शान्ति से बैठे थे .

बादशाह ने उनसे पूछा , ‘ क्यों बीरबल , हमारा विचार तुम्हे कैसा लगा ? अगर महीना 60 दिन का हो तो अपना काम ठीक तरह से चलेगा न ? ‘

बीरबल बोले , ‘ जहाँपनाह , आपका विचार वास्तव में बहुत उत्तम है , लेकिन इसके लिए पहले एक काम करना पड़ेगा . ‘

 

बीरबल का समर्थन पाकर बादशाह बेहद खुश हुए . उन्हें सचमुच लगा कि उन्होंने बहुत बढ़िया बात सोची है . वर्ना बीरबल उनकी बात में नुक्स जरुर निकालते .

आनंद-विभोर होकर उन्होंने पूछा , ‘ बीरबल जल्दी से बताओ , हमें क्या करना पड़ेगा ? ‘

बीरबल ने कहा , ‘ जहाँपनाह , चंद्रमा के कारण पृथ्वी पर एक महीने में 15 चांदनी रातें 15 अँधेरी रातें होती हैं . इसलिए पृथ्वी पर 30 दिन का महिना होता है . यह प्रकृति का नियम है . आप चंद्रमा को आज्ञा दीजिए कि वह 30 चांदनी रातें और 30 अँधेरी रातें बनाए . आपकी आज्ञा के अनुसार अगर चंद्रमा यह परिवर्तन कर लेता है , तो तुरंत ही हम 60 दिन के महीने की मुनादी कर देंगे . ‘

 

‘ ऐसा कैसे हो सकता है ? चंद्रमा हमारी आज्ञा क्यों मानेगा ?

‘ अगर ऐसा नहीं हो सकता तो वैसा बी नहीं हो सकता जहाँपनाह , जैसा आप चाहते हैं . हमारी इच्छाओं  से प्रक्रति के नियम नहीं बदल सकते . ‘ बीरबल ने कहा .

बीरबल की समझ से बादशाह को मालूम हो गया कि उन्होंने 60 दिन का महिना करने के जो प्रस्ताव रखा था , वह गलत था . उन्होंने दरबारियों की तरफ देखकर कहा , ‘ तुम लोग इसलिए बीरबल नहीं हो कि बीरबल की भांति तुमने समझदारी नहीं है . तुम केवल चापलूस हो . ‘

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